नई दिल्ली/कोलकाता. पश्चिम बंगाल में 4 चरण का चुनाव खत्म हो गया, लेकिन राहुल गांधी (Rahul Gandhi) अब तक मैदान में नहीं उतरे हैं. कांग्रेस (Congress) सूत्रों का दावा है कि राहुल पांचवें चरण के लिए या उसके बाद राज्य में प्रचार करेंगे. पार्टी सूत्र मानते हैं कि जहां कांग्रेस की स्थिति मजबूत है, उन सीटों पर पांचवें चरण के बाद ही चुनाव है. इसलिए राहुल गांधी 17 अप्रैल के बाद पूरी ताकत से बंगाल के मैदान में उतरेंगे.
4 राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद जहां एक तरफ बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में पूरी ताकत लगा दी है. वहीं, कांग्रेस के बड़े नेता मैदान से गायब हैं. आलम यह है कि पीएम मोदी और अमित शाह जहां लगातार रैलियों और रोड शो के ज़रिए प्रचार कर रहे हैं वहीं कांग्रेस के स्टार प्रचारक राहुल गांधी ने अभी तक पश्चिम बंगाल में कदम तक नहीं रखा है. कांग्रेस सूत्र कहते हैं कि पांचवें चरण के चुनाव यानी 17 अप्रैल से पहले राहुल गांधी को बंगाल के नक्सलबाड़ी या सिलीगुड़ी में प्रचार के लिए कार्यक्रम दिया गया है, लेकिन अब तक उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया है.

इन जिलों में मजबूत है कांग्रेस
आधा चुनाव खत्म हो गया, लेकिन कांग्रेस कह रही है कि उसके प्रभाव वाले जिलों मुर्शिदाबाद, मालदा और दिनाजपुर जैसे इलाकों में 5वें चरण के बाद चुनाव है. पार्टी का मानना है कि राहुल छठे चरण के चुनाव के लिए यानी 22 अप्रैल से पहले हर हालत में प्रचार की शुरुआत कर देंगे. कांग्रेस के स्टार प्रचारक जयवीर शेरगिल कहते हैं कि कांग्रेस के कप्तान राहुल गांधी जल्दी ही पश्चिम बंगाल के चुनावी मैदान में पूरे दम खम से उतरेंगे और संयुक्त मोर्चा को जिताने के लिए प्रचार करेंगे.'

राहुल ने अब तक इन वजहों से नहीं किया प्रचार
दरअसल, राहुल गांधी के पश्चिम बंगाल न जाने की कई वजहें हैं. पहली वजह ये है कि राहुल बीजेपी से लड़ रही ममता बनर्जी के खिलाफ प्रचार कर उनको कमज़ोर करने के आरोप लेकर केंद्रीय राजनीति में सहयोगी दलों की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहते थे. सपा, राजद, एनसीपी जैसे दल ममता का समर्थन कर चुके हैं और सपा ने जया बच्चन को ममता के पक्ष में प्रचार के लिए भेज दिया है.

राहुल गांधी जानते हैं कि भविष्य में उनकी पीएम बनने की संभावना को नाराज़ ममता कैसे धक्का दे सकती हैं. दूसरी वजह ये थी कि राहुल गांधी ने अपना पूरा ज़ोर केरल और असम जैसे राज्यों में लगा रखा था, जहां पार्टी सरकार बनाने के लिए लड़ रही थी. तीसरी वजह केरल में लेफ्ट पर हमला कर रहे राहुल गांधी बंगाल में जाकर संयुक्त मोर्चे (जिसमें लेफ्ट भी शामिल है) के पक्ष में वोट की अपील कैसे करते?बहरहाल, पार्टी का एक खेमा इस रणनीति को पार्टी के लिए अच्छा नहीं मानता. इस खेमे का मानना है कि अगर बंगाल में पार्टी का अस्तित्व ही नहीं रहेगा, तो वक़्त आने पर ममता को काबू में कैसे किया जाएगा?